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हिमाचल का प्राकृतिक भू-भाग-2

निम्नवर्ती हिमालय या मध्य क्षेत्र

निम्नवर्ती हिमालय या मध्य क्षेत्र  में धौलाधार श्रेणी से पीरपंजाल श्रेणी की तरफ बढ़ने पर ऊंचाई क्रमशः बढती चली जाती है |
शिमला की पहाड़ियों में यह ऊंचाई एकाएक बढ़ जाती है और इसी के दक्षिण में चूढ़- चांदनी की ऊँची पर्वत चोटी है जिसकी ऊंचाई 3647 मीटर है |
सतलुज के उत्तर में ऊंचाई धीरे धीरे बढ़ती है |
मैदानी इलाकों के करीब जाने पर पर्वतों और वादियों की विशेषता दिखाई देने लगती है | किन्तु अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पर्वत श्रेणियां और वादियों की श्रृंखला-सी बन जाती है और इनकी ऊंचाई क्रमशः बढ़ती ही जाती है |
काँगड़ा घाटी में दो पर्वत श्रेणियां अवस्थित है – धौलाधार पर्वत श्रेणी और पीरपंजाल पर्वत श्रेणी |

धौलाधार का अर्थ होता है श्वेत चोटी | यह बद्रीनाथ के पास ऊपरी हिमालय पर्वत श्रेणी से आरम्भ होता है | रामपुर बुशहर के पास सतलुज, लार्जी के पास व्यास और चम्बा के दक्षिण-पश्चिम में इसे रावी नदियां विभाजित करती है |
धौलाधार श्रेणी का उतरी सिरा बाड़ा बनघाल की परवतग्रंथि पर पीरपंजाल श्रेणी के दक्षिणी सिरे से जुड़े हुए है | धौलाधार श्रेणी की औसत ऊंचाई लगभग 4550 मीटर है|
काँगड़ा का वादी के ऊपर यह श्रेणी एकाएक 3600 मीटर की ऊंचाई तक उठी हई है | धौलाधार श्रेणी के दक्षिण में एक प्राचीन हिमोढ़ उपवन है, जो लगभग 1200 मीटर की ऊंचाई तक सिमित है |

काँगड़ा के कुछ भागों में तो हिमनद 950 मीटर की निम्न ऊंचाई तक फैला हुआ है |
पीरपंजाल श्रेणी निम्नवर्ती हिमालय श्रेणी में सबसे बड़ी है | यह सतलुज के तट के पास ऊपर हिमालय पर्वत श्रेणी को दो भागों में बांटती है |
इस प्रकार, पीरपंजाल जलविभाजक का कार्य करती है , जिसके एक ओर चिनाब तथा दूसरी ओर व्यास तथा रावी नदी बहती है | रावी के निकसन के स्थान पर सतलुज धौलाधर श्रेणी की ओर मुड़ जाती है |
पीरपंजाल में लाहुल के दक्षिण में अनेक हिमनद पाए जाते है | यहाँ एक बहुत बड़ा भूभाग हिम रेखा के ऊपर स्थित है |
4880 मीटर ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रा और अन्य अनेक दूसरे दर्रे इसे बीचो बीच विभाजित करते है | इनमे से अधिकांश दर्रे बर्फ से ढके रहते है और दिसंबर से अप्रैल तक के मध्य इन् दर्रों को पार नहीं किया जा सकता |
इस क्षेत्र की जलवायु तथा मिटटी फलों तथा आलूके उत्पादन के सर्वाधिक उपयुक्त है | निम्नवर्ती हिमालय या मध्य क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश के पांच जिले – सिरमौर, मंडी , काँगड़ा, पालमपुर तथा चम्बा के क्षेत्र आते थे |

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